कथित ट्रस्टियों का धार्मिक संपत्ति को लीज व बेचने का नहीं कोई अधिकार
पट्टा रद्द करने को दायर किया हैं न्यायालय में वाद
गंगा घाट पर स्वर्गवासी दादा व परदादा का पितृ आमवस्या पर किया श्राद्ध कर्म
हरिद्वार। सब्जीमंडी रामघाट स्थित बदरी बावला धर्मार्थ धर्मशाला के मामले में असल ट्रस्टी सामने आने से नया मोड़ आ गया हैं। बीते दिन बद्री दास के वंशज प्रदोष सिंघल रामघाट स्थित बदरी बावला धर्मशाला पहुंचे और उन्होंने धर्मशाला में बने गंगा घाट पर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ आमवस्या पर विधि-विधान से श्राद्ध कर्म किया। इस दौरान उन्होंने जानकारी देते हुए दावा किया कि बदरी बावला धर्मशाला का निर्माण उनके पूर्वजों ने धर्मार्थ कार्यो के उद्देश्य के लिए किया था। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज इस धर्मशाला के मुख्य ट्रस्टी व मालिक थे । उन्होेंने आगे बताया कि वर्तमान कथित ट्रस्टियों को धर्मशाला की देख-रेख के लिए ट्रस्टी बनाया था। जिन्हें धार्मिक संपत्ति को किसी भी तरह का लीज व बेचने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि धर्मशाला की संपत्ति धर्मार्थ वक्फ चली आती हैं। कथित ट्रस्टियों ने समझौतानामें का उल्लंघन करते हुए धर्मशाला की जिन संपत्तियों का पट्टा द्ववामी किया हैं वह सरासर अवैध व शून्य हैं। कथित ट्रस्टियों द्वारा की गई लीज रद्द किए जाने के लिए उनके द्वारा न्यायालय हरिद्वार में वाद दायर किया गया हैं।
बताते चलें कि कुछ माह पूर्व रामघाट स्थित बदरी बावला धर्मशाला की संपत्ति कथित ट्रस्टियों के द्वारा खुर्द-बुर्द किए जाने को लेकर मामला खासा सुर्खियों में रहा हैं। कथित ट्रस्टियों ने न सिर्फ धर्मार्थ धर्मशाला की संपत्ति को बिना न्यायालय की अनुमति के ही बेच दिया बल्कि, धर्मशाला में निर्धन यात्री व साधु-संतों के ठहरने के लिए बनाए गए कमरों सहित परिसर में बने भगवान श्री राधाकृष्ण के मंदिर पर भी ताले जड़ दिए। धर्मशाला में रह रहे किराएदारों निकालने के लिए कथित ट्रस्टी खासा दबाव बनाए हुए थे। कई बार मारपीट की नौबत आ गई और मामला थाना तथा मुकदमेबाजी तक पहुंच गया । जागरूक व आस्थावन लोगों ने आगे आकर इस धर्मार्थ संपत्ति को बचाने का बीड़ा उठाया और तब जाकर कहीं 92 के तहत मामला न्यायालय तक पहुंच पाया। जिसके बाद से मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन हैं। सूत्र बताते हैं कि कथित ट्रस्टियों ने झूठे शपथ पत्रों और कूटरचित अभिलेखों को प्रस्तुत कर माननीय न्यायालय को भी गुमराह करने का प्रयत्न किया हैं।
अब असल ट्रस्टियों के वंशज होने का दावा कर रहे रूड़की निवासी प्रदोष सिंघल ने कथित ट्रस्टियों के द्वारा किराएदारों को धर्मशाला की संपत्ति में पट्टा द्ववामी किए जाने को अवैध व शून्य बताते हुए जिलाधिकारी से धर्मार्थ संपत्ति खुर्द-बुर्द करने वालों के खिलाफ कार्रवाही के लिए प्रार्थना पत्र दिया हैं। साथ ही न्यायालय हरिद्वार में मय साक्ष्यों के अवैध लीज को रद्द किए जाने का वाद दायर किया हैं। जिसके बाद से कथित ट्रस्टियों और धार्मिक संपत्ति का पट्टा द्ववामी कराने वाले किराएदारों में हडकंप मचा हैं।

